पाठ 4

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मण्डली सभा

जब आप एक मसीही व्यक्ति बनते हैं , आप परमेश्वर के सदस्य बनते हैं। हर एक आत्मिक संतान को आत्मिक परिवार का हिस्सा बनना आवश्यक है। परमेश्वर आपका स्वर्गीय पिता है और सभी मसीही आपके भाई बहन जैसे हैं यहां परिवार जीवित परमेश्वर का मंदिर है। यह घर घराना है , एक भवन नहीं है और मण्डली एक आराधना का स्थान नहीं है परंतु विश्वासियों का समूह है।

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I. पवित्रशास्त्र यीशु और मसीहियों के बीच के संबंध का कैसा विवरण देता है ?

  • रोमियों 12:5

  • इफिसियों 1:22-23

II. मसीह का मण्डली में क्या स्थान है ?

  • इफिसियों 5:23

III. मंडली के कार्य

कार्य

पद

आप की आवश्यकता

आराधना

याह की स्तुति करो! यहोवा के लिये नया गीत गाओ, भक्तों की सभा में उसकी स्तुति गाओ! भजन 149:1

परमेश्वर की आराधना करना

संगति

और प्रेम, और भले कामों में उक्साने के लिये एक दूसरे की चिन्ता किया करें। इब्रानियों 10:24

बांटना

शिक्षा

और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्त तक सदैव तुम्हारे संग हूं॥ मती 28:20

आज्ञा मानना सीखना

सेवकाई

जिस से पवित्र लोग सिद्ध हों जाएं, और सेवा का काम किया जाए, और मसीह की देह उन्नति पाए इफिसियों 4:12

सेवा करना

पवित्र आत्मा का सामर्थ्य

परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे प्रेरितों 1:8

सुसमाचार को फैलाना

IV. क्या आज मसीहियों मंडली नहीं जाना विकल्प है ? हाँ / नहीं / यह निर्भर करता है

क्या मंडली जाने में आपको तकलीफ होती है ? हाँ / नहीं / यह निर्भर करता है

V. आपको मंडली में उपस्थित क्यों होना चाहिए ?

  1. क्योंकि हमें आराधना, संगति, शिक्षा, सेवकाई और पवित्र आत्मा के सामर्थ्य की जरूरत है।

  2. क्योंकि यह परमेश्वर की आज्ञा है।और एक दूसरे के साथ _______ होना ने छोड़ें, जैसे कि कितनों की _________ है, पर एक दूसरे को _________ रहें; और ज्यों ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों त्यों और भी _______ यह किया करो॥ (इब्रानियों 10:25)

  3. पवित्र शास्त्र के सच्चाई से भटकने से बचने के लिए।

  4. क्योंकि आपकी सहायता के लिए मंडली में परिपक्व मसीही जन है।

VI. मंडली में हमारी तीन कर्तव्य

A. मसीह में जुड़ने का हमारा कर्तव्य - बपतिष्मा ( रोमियों 6:1-14)

a. बपतिस्मा / जल - दीक्षा हमारे विश्वास को पूर्ण करना है।

यीशु ने कहा बपतिष्मा लेना धार्मिकता को पूरा करना है। ( मती 3:15)

यीशु ने हमारे लिए एक उदाहरण दिया। उसने बपतिस्मा लिया हालाँकि उसने कभी पाप नहीं किया था लेकिन उसने ऐसा किया क्योंकि वह यह जानता था यह एक सही कार्य है। बपतिस्मा / जल - दीक्षा हमारे विश्वास को घोषणा करना है।

b. बपतिस्मा / जल - दीक्षा के शब्द और कार्य उपस्थित लोगों को यह बताते हैं की अब हम अपना स्थान मसीह में प्राप्त करते हैं ( रोमियों 6:3)

c. बपतिस्मा / जल - दीक्षा हमारे विश्वास को पुष्टीकरण करना है।

हम यह जानते हैं और महसूस करते हैं कि हम अपने पुराने मनुष्यत्व से छुड़ाए गए हैं और पुनुरुत्थान के सामर्थ्य का एक नया जीवन जीते हैं ( रोमियों 6:6-14)

d. बपतिस्मा / जल - दीक्षा हमारे विश्वास को गवाह है।

बपतिस्मा यह दर्शाने के लिए है कि हम मर चुके हैं गाड़े गए हैं और प्रभु के साथ दुबारा जी उठे हैं।

सो उस ________ का बपतिस्मा / जल - दीक्षा पाने से हम उसके साथ _______ गए , ताकि जैसे मसीह पिता की ________ के द्वारा मरे हुओं में से ________ गया , वैसे ही हम भी ____________ की सी चाल चलें। ( रोमियों 6:4)

e. बपतिस्मा / जल - दीक्षा हमारे विश्वास को संकेत है।

बपतिस्मा / जल - दीक्षा में हमारे पास जमा करने का सामान नहीं। और तब हम बचाये जाते हैं हैं जब हम अपने मुंह से अंगीकार करते हैं और ह्रदय से विश्वास करते हैं ( रोमियों 10:9)

 

B. याद करने के प्रति हमारा कर्तव्य - प्रभु - भोज

a. यीशु मसीह ने खुद व्यक्तिगत रूप से प्रभु भोज को अपनी मृत्यु और हमारे पापो के लिए अपने लहू बहाने यादगारी में किया। मती 26:17-19, 26-30

b. जब हम प्रभु भोज स्वीकार करते हैं तब यह हमारी मदद करता है कि हम याद करें और धन्यवाद दें।

परन्तु वह हमारे ही _______ के कारण घायल किया गया , वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु _______ गया ; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके _______ खाने से हम ______ हो जाएं। यशायाह 53:5

c. प्रभु भोज को ग्रहण करते हैं तब यह हमारे कार्य और विश्वास कर जांच करने में सहायक है। 1 कुरुन्थियों 11:23-29

 

C. देने के प्रति हमारा कर्तव्य - दान

भेंट देना आराधना के कार्य के रुप में परमेश्वर को दान देना है। भेंट देने में एक व्यक्ति का जीवन , लक्ष्य , समय , क्षमता और आर्थिक दान शामिल है। आर्थिक रूप से भेंट देना परमेश्वर की ओर से आवश्यक है और यह शिष्य के विश्वास , प्रेम , और आज्ञाकारिता की परीक्षा करता है। पवित्र शास्त्र में तीन प्रकार के आर्थिक भेंट का जिक्र किया गया है।

a. दशमांश . परमेश्वर हमें आज्ञा देते हैं कि हम दसमांश दें ; दसमांश परमेश्वर का है। यह एक स्वेच्छा दान नहीं हूं ; परंतु यह हमसे अपेक्षित है। ( लैव्य 27:30-31) दसमांश देना अनिवार्य है बाकी 90% के विषय में आप निर्णय ले सकते हैं लेकिन हमें 10% परमेश्वर को वापस देना अनिवार्य है क्योंकि यह उसका है।

क्या ______ परमेश्वर को धोखा दे सकता है ? देखो , तुम मुझ को धोखा देते हो , और तौभी पूछते हो कि हम ने ___________ में तुझे लूटा है ? दशमांश और उठाने की भेंटों में। तुम पर भारी शाप पड़ा है , क्योंकि तुम मुझे लूटते हो ; वरन सारी _______ ऐसा करती है। सारे _______ भण्डार में ले आओ कि मेरे भवन में भोजन - वस्तु रहे ; और सेनाओं का यहोवा यह कहता है , कि ऐसा कर के मुझे _________ कि मैं ________ के झरोखे तुम्हारे लिये खोल कर तुम्हारे ऊपर _________ आशीष की वर्षा करता हूं कि नहीं। मलाकी . 3:8-10

b. उपहार और भेंट . यह पूरी तरह स्वेच्छा दान है जो एक धन्यवादित और ईमानदार हृदय से आता है। इस दान का राशि आपका व्यक्तिगत निर्णय है।हम बिना भेंट और उपहार के परमेश्वर की आराधना नहीं कर सकते। हमें निरंतर परमेश्वर की उपस्थिति में खाली हाथ नहीं आना चाहिए।

c. प्रेम भेंट . यह दूसरों को दिया जाने वाला भेंट है। इसे देने का प्रेरणा प्रेम है और यह दूसरे व्यक्ति की आवश्यकता के आधार पर दिया जाता है। उपहार और प्रेम भेंट दशवांश का स्थान नहीं ले सकते हैं।

इस सप्ताह एक साथ मंडली बनने का समर्पण करें। अपने सभा के समय में इन 3 कर्तव्य को जोड़े।

 

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